पेट में अफारा दूर करने के घरेलू नुस्खे
पेट में अफारा होने के कारण और उपाय
पेट में अफारा होने के कारण---
अजीर्ण, मंदाग्नि तथा अतिसार के कारण पेट में वायु भर जाती है और पेट फूल जाता है।
इसी को अफारा कहते हैं । इसमें पेट के भीतर वायु भरने के बाद रुक जाती है ।
अनियमित भोजन, भूख से अधिक चीजें खाने, आमाशय में सूजन , पित्त के कारण अजीर्ण,
अमाशय का फैलना, मानसिक अशांति ,अमाशय की दीवार की
कमजोरी ,हाजमा ठीक ना होने आदि कारणों से प्रायः पेट फूल जाता है।
पेट में अफारा होने के लक्षण ----
अफारा रोग में रोगी को बेचैनी होती है, जी घबराता है तथा सांस लेने में तकलीफ होती है ।
पेट की नसें फूल जाती है ,कब्ज हो जाता है ।छाती में जलन,हृदय तक वायु का भारीपन, सिर दर्द,
सिर चकराना, नाड़ी दुर्बलता आदि के लक्षण दिखाई देते हैं। वायु ऊपर या नीचे से निकल जाने पर
रोगी को कुछ शांति मिलती है।
अफारा दूर करने के घरेलू उपाय---
👉 अमरबेल को पीसकर पेट पर लेप करने से अफारा तुरंत शांत हो जाता है ।वायु डकारों अथवा अपान द्वारा निकल जाती है।
👉 2 ग्राम राई को शक्कर के साथ खिलाएं। ऊपर से 50 ग्राम जल में जरा सा चूना घोल कर रोगी को पिला दे। अफारा ठीक हो
जाएगा।
👉 एक रत्ती हींग पानी से निगल लें। अपान वायु खारिज होने लगेगी।
👉 छोटी इलायची का चूर्ण एक चुटकी तथा भुनी हुई हींग एक रत्ती--- दोनों को नींबू के रस में मिलाकर रोगी को दिन में तीन
बार दें।
👉 हीरा हींग पानी में घोलकर नाभि तथा पेट पर मलें।
👉 एरंड के तेल में जरा सा देसी घी मिलाकर पेट पर मालिश करें।
👉 गेहूं की भूसी तथा जरा सा सेंधा नमक--- दोनों को पोटली में बांध लें। इस पोटली को तवे पर बार-बार गर्म करके पेट पर
सेंक करें।
👉 सोंठ के काढ़े में एक चम्मच एरंड का तेल मिलाकर पिलाएं।
👉 4 रत्ती बच का चूर्ण तथा 8 रत्ती सौंफ का चूर्ण ---दोनों को मिलाकर पानी के साथ सेवन करें।
👉 नींबू के रस में जायफल घिसकर चाटने से पेट का दर्द तथा अफारा जाता रहता है।
👉 तारपीन के तेल में थोड़ा सा एरंड का तेल डालकर पेट पर मालिश करें। तारपीन के तेल का प्रयोग अकेले नहीं करना चाहिए।
👉 आधा चम्मच अजवाइन ,एक छोटी हरड़ ,एक चुटकी सेंधा नमक तथा आधी चुटकी हींग--- इन सब को पीसकर गुनगुने जल के
साथ
सेवन करें।
👉 प्याज के दो चम्मच रस में जरा सा नमक और जरा सी हींग मिलाकर प्रयोग करें।
👉 सेंधा नमक ,अदरक तथा नींबू इन तीनों को मिलाकर लेने से पेट का दर्द रुक जाता है तथा वायु खारिज होने लगती है।
👉 पीपल और दोनों को बराबर की मात्रा में लेकर जरा सा गुड़ मिलाकर खाएं।
👉 एक चम्मच मेथी के दाने तथा दो काली मिर्च--- दोनों को मिलाकर पीस लें फिर इस चूर्ण को पक्की लगाकर
ऊपर से
गुनगुना पानी पी जाएं।
👉 अदरक की एक गांठ ,काली मिर्च दो दाने ,अनार दाना 5 ग्राम ,काला नमक-1 चुटकी तथा हींग एक
रत्ती ---सबको पीसकर पानी के साथ सेवन करें।
अफारा दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय---
👉काला जीरा, सहिजन की जड़ ,चीता की जड़, सेंधा नमक तथा पीपल--- इन सबको बराबर की मात्रा में
लेकर चूर्ण बना लें। एक चम्मच चूर्ण खाकर ऊपर से जल पी लें।
👉 पीपल,सौंठ तथा अजवाइन--- तीनों समान मात्रा में लेकर उसमें एक रत्ती हींग तथा जरा सा काला नमक
मिलाकर चूर्ण बना लें|प्रतिदिन सुबह एक चम्मच चूर्ण खाकर ऊपर से जल पी लें।
👉 10 ग्राम निसोथ ,3 ग्राम पीपल ,10 ग्राम खांड , 10 ग्राम अजवाइन ,3 रत्ती हींग तथा दो रत्ती कपूर--- सबको
पीसकर चूर्ण बना लें। एक -एक चम्मच चूर्ण सुबह-शाम जल के साथ ले। दो दिनों तक इसे निरंतर लेने से अफारा
की शिकायत सदा के लिए दूर हो जाएगी।
👉 सौंठ , काली मिर्च, बड़ी हरड़ का छिलका,अनारदाना ,काला नमक ,चीता की जड़ तथा भुनी हींग सब
10-10 ग्राम लेकर चूर्ण बना लें। अफारा होने पर एक चम्मच चूर्ण पानी के साथ सेवन करें।
👉 तेजपात, नागकेसर ,धनिया , तालीसपत्र, विडनोन , काला जीरा ,पीपल पीपरामूल , सेंधा नमक और
अमरबेल 10 -10 ग्राम तथा सोंठ ,काली मिर्च, जीरा एवं तज 5 - 5 ग्राम ---सबको कूट- पीसकर चूर्ण बना लें।
सुबह ताजा पानी से एक चम्मच चूर्ण खाकर थोड़ी देर टहले| वायु निकलना शुरू हो जाएगी।
👉 एक तोला असगंध को गोमूत्र में पेश कर पी जाए वायु निकलने लगेगी।
👉 चव्य और सौंठ ---दोनों आधा-आधा चम्मच लेकर गोमूत्र में पीसकर खा जाए| ऊपर से पानी पी ले।
अफारा होने पर ध्यान देने योग्य बातें---
👉 सादा सुपाच्य भोजन ,मूंग की दाल की पतली खिचड़ी छाछ या दही के साथ ,बिस्कुट तथा पतला दूध रोगी को दें।
👉 पालक ,चोलाई ,तरोई, लौकी, परवल ,टिंडा, मूली और गाजर की सब्जियां कम घी में छौंककर कर खाएं।
👉 मिर्च -मसालेदार चीजें ,वायु बनाने वाले पदार्थ ,गोभी, चने, भिंडी, मिस्से की रोटी आदि ना दें।
👉 चाय ,लहसुन प्याज, घुइयां ,आलू आदि ना खाएं।
👉 सुबह उठकर कुल्ला करने के बाद दो गिलास पानी पिएं। नित्य सुबह टहलने का कार्यक्रम बनाएं।
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