आयुर्वेद और स्वस्थ जीवन

आयुर्वेद का  मानव जीवन में महत्व 



पिछले कुछ वर्षों में विकास की गति काफ़ी तेज़ रही है। लेकिन इस तेज़ रफ़्तार भरी दौड़ में आदमी खुद से दूर चला गया है। एक ओर जहाँ मृत्युदर पर नियंत्रण के दावे हुए हैं :नई -नई चिकित्सा पद्धतियों का विकास हुआ है ,वहीँ रोगों ने भी नए -नए मुखौटे बदले हैं। आज के समय में तो कोरोना जैसी महामारी ने अपने पाँव पसार लिए हैं। 
कई बार तो ऐसा भी हुआ है कि जो रोग बिल्कुल खत्म हुए मान लिए गए थे ,उन्होंने भी आक्रामक रूप में ,या नए  कलेवर के साथ अपना सिर उठा लिया। कहने का अर्थ है की स्तिथि में कुछ ख़ास फर्क नहीं आया। इस तथ्य को आज आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञ भी स्वीकार कर रहे हैं। वे दिनचर्या को नियमित करने पर बल दे रहे हैं। स्वस्थ रहने के लिए व्यायाम पर जोर दिया जा रहा है। 

इसके अलावा अब योग क्रियाओं को भी चिकित्सा के रूप में स्वीकारा जा रहा है। 


आज विश्व के अनेक देशों में आयुर्वेदिक तथा अन्य चिकित्सा विधियों जैसे एक्यूप्रेशर ,होमियोपैथी ,चुम्बक चिकित्सा आदि को तीव्र गति से अपनाया जा रहा है। कारण ? एक तो ये सस्ती तथा सरलता से उपलब्ध है ,दूसरे इनका किसी प्रकार का दुष्प्रभाव नहीं है। 

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