आयुर्वेद ---कुछ जरुरी बातें
आयुर्वेद ---- कुछ ध्यान देने योग्य बातें
आयुर्वेद एक घरेलू चिकित्सा के रूप में
आयुर्वेद हमारे देश की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति है। आयु के काल में शरीर के हित -अहित की जानकारी ,शरीर में तरह-तरह के रोगों की उत्पति के कारण ,और सदा के लिए रोगों से बचने का ज्ञान तथा शरीर को पूर्ण रूप से स्वस्थ रखते हुए लम्बी आयु बनाने वाले ज्ञान को "आयुर्वेद"कहते है।
आयुर्वेद चिकित्सा के अंतर्गत घऱेलू चिकित्सा का महत्व इसलिए है क्योंकि यह पूर्ण रूप से प्राकृतिक जड़ी-बूटियों ,घरेलू मसालों तथा वृक्षों पर निर्भर है। इस चिकित्सा का लाभ उठाने के लिए हमें डॉक्टर के पास नहीं भागना पड़ता। उदाहरण के लिए रात --बेरात घर के किसी सदस्य के पेट में दर्द उठता है। तब हमें फ़ौरन अपने रसोईघर के मसालदान के पास जाना चाहिए। आधा चमच्च अजवाइन, एक चुटकी काला या सादा नमक और दो रत्ती हींग ----तीनो चीजों को यदि पीसकर हम रोगी को पानी के साथ दें तो देखते ही देखते उसका पेट दर्द गायब हो जायेगा
इस प्रकार आयुर्वेद के हज़ारों नुस्खे और योग है जो घरेलू चिकित्सा की कीमती औषधियां हैं।
आयुर्वेद की लोकप्रियता
आयुर्वेद हज़ारों वर्ष पुराना है। जब मानव जंगली अवस्था में वनों में विचरण करता था ,तब भी वह जड़ी-बूटियों ,जल ,पेड़ की पत्तियों ,फलों ,जड़ों ,लकड़ियों आदि का प्रयोग छोटी -मोटी बीमारियों को दूर करने के लिए करता था। आज चिकित्सा विज्ञान का क्षेत्र अत्यधिक विकसित हो गया है ,लेकिन प्रतिदिन की ज़िंदगी में घरेलू नुस्खे मनुष्य के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहे हैं। कुछ नुस्खे तथा जड़ी-बूटियाँ तो इतनी कारगर हैं कि इनके सामने बड़े-बड़े डॉक्टर दातों तले उंगली दबाने लगते है। सचमुच हमारे पूर्वजों ने अपने जीवन को तपाकर इनकी खोज की है।
सस्ती और अनमोल चिकित्सा ---आयुर्वेद
आयुर्वेद चिकित्सा द्वारा कोई भी व्यक्ति सरल तथा सस्ती दवाओं को आसानी से प्राप्त करके घर बैठे स्वयं इलाज कर सकता है। आयुर्वेद की सबसे बड़ी विषेशता यह है कि इसका शारीरिक अंगों पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। यह चिकित्सा शरीर के भीतर विजातीय तत्वों को बाहर निकालती है तथा शरीर को शीघ्र ही स्वस्थ कर देती है। इसमें रोगों को दूर करने की अनोखी शक्ति है।



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